Friday, November 16, 2018

تعرف على فخر الدين باشا الذي أثار حربا كلامية بين تركيا والإمارات

ويرى الباحث في شؤون الجماعات الاسلامية، مصطفي زهران، أن الجماعة الاسلامية كان لها دور بارز منذ يوليو 2013 في ترشيد شبابها ولا يتعين تعميم العقاب بحق أعضائها، وقال لبي بي سي: "منذ احداث الثالث من يوليو 2013 لعب حزب "البناء والتنمية" دورا هاما في ترشيد شباب الإسلاميين مع تعدد توجهاته وتنويعاته المختلفة في الداخل المصري وخاصة بالجنوب المصري للحيلولة دون تشظى الحالة الراديكالية، وخاصة بعد صعود تنظيم الدولة الإسلامية، فضلا عن لعب دور وسيط بين السلطة من جهة وجماعة الاخوان المسلمين من جهة أخرى في بعض المواقف".

لكن عصو المجلس الأعلى لمكافحة الإرهاب في مصر، خالد عكاشة، يرى أن ممارسات قيادات وأعضاء بالجماعة كانت سببا في حكم المحكمة.
ويضيف في حديث لبي بي سي أن إدراج الجماعة جاء "نظرا لأن عددا من قيادات هذه الجماعة وعددا من عناصرها ارتدوا على هذه المراجعات التي صاغها قبل يناير/كانون الثاني 2011 ."
ويصر عكاشة على أن الجماعة الاسلامية "تنظيم ارهابي" نشأت منذ بدايتها كتنظيم مسلح، مضيفا أن "مسألة المراجعات كانت مجرد محطة وكان يتعين أن يكون الحديث عن حل الجماعة والخروج منها بتشكيل أحزاب كما حاولوا أن يفعلوا أثناء حكم الاخوان."
وحول إدراج الجماعة ككل كتنظيم إرهابي وليس كأفراد أو أعضاء قال عكاشة: "إن الجماعة وضعت نفسها في موقف ملتبس، وذلك عندما وقفت بقدمين أحدهما في الساحة السياسة عبر حزب البناء والتنمية، والأخرى في تشكيلات وتنويعات تعمل بشكل سري وتنتهج نهج الارهاب."
وعن رؤيته لكيفية الخروج من هذا الموقف بالنسبة للذين التزموا نبذ العنف قال عكاشة إن البيت يحتاج لإعادة ترتيب من الداخل، إذ أن محاولة التمسك بهذا الإسم رغم تشويهه من بعض الأجنحة هو الذي يلقي بالتبعة على القيادات المحترمة التي التزمت بالفعل بالمراجعات".
ويقترح عكاشة أن يتخذ هؤلاء المشار اليهم إجراءات على الأرض منها إصدار بيانات صريحة وواضحة تنأى عن الذين يصدرون بيانات ضد الدولة ويقومون بأعمال ضدها.
واختتم عكاشة مؤكدا أن "هذا الكيان يحتاج أن يكون معلنا وواضحا وتحت مسمى جديد كي يسحب السجادة من تحت أقدام من عادوا الى العنف والارهاب."
يحي العالم هذه الأيام ذكرى مرور قرن على وضع الحرب العالمية الأولى أوزارها بانتصار بريطانيا وفرنسا وغيرها على ألمانيا والسلطنة العثمانية.
وقد شهدت المنطقة العربية معارك عدة بين الحلفاء والعرب الذين وقفوا إلى جانبهم والقوات التركية، وكان العراق وشبه الجزيرة العربية من أهم ساحات هذه المعارك التي انتهت بهزيمة القوات العثمانية وخروجها من الأراضي العربية.
واندلعت ما عرف آنذاك بـ "الثورة العربية الكبرى " في العام الثالث من الحرب العالمية الأولى التي بدأت عام 1914 وانتهت عام 1918، وقد اندلعت شرارتها عندما قام مقاتلون عرب غير مدربين على خوض عمليات قتالية مثل الجنود النظاميين، في شهر يونيو/حزيران عام 1916 بشن هجوم على الحاميتين العثمانيتين في كل من مكة والمدينة.
وعند إخفاق الهجوم في تحقيق أي نجاح تراجعت القوات المهاجمة بعد أيام قليلة وفرضت الحصار على الحاميتين، ولم يطل الوقت كثيراً إذ استسلمت حامية مكة، لذلك أرسلت بريطانيا تعزيزات عسكرية لمساعدة القوات العربية ومن بينها كتيبة مدفعية قدمت من مصر التي كانت تحت الاحتلال البريطاني وشاركت بفعالية في السيطرة على مكة في شهر يوليو/ تموز 1916.

Friday, October 5, 2018

कहानी 13 साल के एक साइको किलर की, जिसने अपनी चार साल की बहन को बेरहमी से मार डाला

अमरीका के टेक्सास शहर में रहने वालीं चैरिटी ली जब छह साल की थीं तो उन्होंने अपने सामने ही अपने पिता की मौत देखी थी और ऐसा करने वाली उनकी मां थीं.
सालों बाद जब चैरिटी ली के 13 साल के बेटे पेरिस ने अपनी ही चार साल की बहन एला की हत्या की तो उनके लिए ये होश उड़ाने वाला था.
अपनी बेटी को याद करते हुए चैरिटी बीबीसी को बताती हैं, "एला चंचल और ख़ूब बात करने वाली थी. दूसरी ओर पेरिस का स्वभाव शर्मीला और चुप रहने वाला था. पेरिस एला को बहुत प्यार करता था और वह भी अपने बड़े भाई की इज़्ज़त करती थी."
"पेरिस बेहद शांत बच्चा था. वह ख़ुद में व्यस्त रहता, बिल्कुल दूसरे बच्चों की तरह. लेकिन उसकी इन बातों से मुझे कभी कोई परेशानी नहीं रही."
"लेकिन जब इन बीती बातों पर ग़ौर करो तो लगता है कि वो एक संकेत था. उस वक़्त यही लगता रहा कि ये सामान्य बात है, ये बच्चों की उम्र में होता ही है."
"जब पेरिस की उम्र 12 साल थी और एला लगभग दो या तीन साल की रही होगी, उस वक़्त मैं धीरे-धीरे ड्रग्स की ओर बढ़ने लगी थी. मैंने यूं तो इसे सालों पहले छोड़ दिया था लेकिन मैं फिर इसकी शिकार हो रही थी." इस दौरान ही एक ऐसी घटना हुई जिसने चैरिटी को परेशान किया. चैरिटी की मां के एक फ़ार्म में पेरिस और एला अपनी आंटी के साथ खेल रहे थे. चैरिटी बताती हैं, "उनके बीच किसी बात को लेकर झगड़ा हो गया. मैंने दोनों की लड़ाई सुलझाई. इसके बाद जब मैं पेरिस को खोजने लगी तो मुझे पता चला कि वो किचन से एक चाकू लेकर बाहर निकला है. मैंने उसे जब खोजा तो वो मुझे रोता हुआ मिला. वह कह रहा था कि यदि वो उसके पास आएंगे तो वह ख़ुद को ज़ख़्मी कर लेगा."
''मैं जानती थी कि पेरिस मेरे नशे की आदत से काफ़ी दुखी था. ये सब उसी के कारण हो रहा था. मैं इसलिए परेशान थी, क्योंकि पेरिस की प्रतिक्रिया अतिश्योक्तिपूर्ण थी. मैं उसे अस्पताल ले गई. डॉक्टर को पेरिस में होमोसाइडल (हत्यारा) प्रवृत्तियां नज़र नहीं आईं."चार फ़रवरी... साल 2007, मैं एक रेस्त्रां में वेट्रेस का काम कर रही थी."
''मैं जब काम पर जा रही थी तो एला बाथटब में थी. सामान्य तौर पर वह मुझे गले लगाती और कहती ''गुडबाय मां'', लेकिन उस दिन मुझे कई बार गले लगाया और चूमा.''
''उस दिन पेरिस मुझसे नाराज़ था. ये सामान्य सी बात थी, क्योंकि ऐसा होता था. मुझे ठीक-ठीक याद है कि मैं उसके पास गई और कहा- तुम्हे पता है कि मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूं. हम कई बुरे दौर से गुज़र चुके हैं और हम इससे भी उबर जाएंगे."
"इसके बाद मैं काम पर चली गई"
''आधी रात का वक़्त था. रेस्त्रां बंद हो रहा था, ठीक उसी पल दो जासूस और एक पादरी आए और मुझे बताया कि आपकी बेटी घायल है और घर पर है. जब मैंने पूछा कि उसे अस्पताल क्यों नहीं ले गए तो उन्होंने मुझे बताया कि वह मर गई है. और उसे मारने वाला मेरा ही बेटा और उसका बड़ा भाई पेरिस है."
पेरिस ने नैनी (बच्चों की देखभाल करने वाली) को मां के वापस आने से पहले ही घर भेज दिया. इसके बाद वह अपनी चार साल की बहन के कमरे में गया. उसका यौन शोषण किया, मारा, गला दबाया और फिर उस पर 17 बार चाकू से वार किया.
आपातकालीन मदद बुलाने के बजाय पेरिस ने अपने दोस्त को बुलाया. उससे बात की. उस वक़्त के गवाह बताते हैं कि उसने अपनी बहन को बचाने के लिए कोई कोशिश नहीं की."
"अगले दिन मैं पेरिस से मिलने गईं जहां उसे नज़रबंद रखा गया था."
"उसने मुझसे कहा- आप हमेशा कहती थी कि आप किसी की हत्या तभी कर सकते हो जब वो आपके बच्चे के साथ कुछ बुरा करे, तो अब आप क्या करेंगी?"
"उसके सवाल में वो डर क़तई नहीं था कि उसकी मां उसके साथ कुछ बुरा करेगी बल्कि वह सोच, उसके शब्द मुझे चैलेंज कर रहे थे. ये पहली बार था जब मैं अपने बेटे पेरिस में पेरिस को नहीं किसी और को देख रही थी."
"मैंने कहा, मैं तुमसे वही वादा करूंगी जो मैंने तब किया था जब तुम पैदा हुए थे."
''जब मेरी गोद में पहली बार पेरिस आया था तो मैंने उसके कानों में कहा था कि मुझे नहीं पता कैसे एक मां बना जाए. लेकिन एक वादा जो मैं तुमसे करती हूं वो ये कि मैं हमेशा तुम्हारे लिए अपना सबसे बेहतर करूंगी."
"मैं चाहती थी कि वो जाने कि मेरा प्यार उसके लिए बेशर्त है. मैंने उससे कहा- मैं हमेशा तुम्हारी बेहतर मां बनने की कोशिश करूंगी. कुछ भी हो जाए मैं हमेशा तुमसे प्यार करूंगी."

Tuesday, September 25, 2018

ज्योतिष पर सेमिनार में विशेष नक्षत्रों पर चर्चा

यहां सेक्टर-35 में इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ वैदिक एस्ट्रोलोजी द्वारा एक सेमिनार का आयोजन किया गया। आयोजक अनिल ग्रोवर ने बताया कि इस सेमिनार में मुख्य वक्ता वैदिक शास्त्रों के विद्वान डा‍ॅ. सुरेश चंद्र मिश्रा थे। कार्यक्रम में नक्षत्र ज्योतिष पर चर्चा की गयी। इसमें करीब 50 लोगों ने भाग लिया। ग्रोवर के मुताबिक सेमिनार का मुख्य विषय था—स्पेशल नक्षत्र। डा‍ॅ. मिश्रा ने विशेष नक्षत्रों 10, 16, 18, 19, 22 और 25वें की बदलती स्थिति-दशा के मानव के स्वास्थ्य, बुद्धि व करियर पर भविष्य में पड़ सकने वाले प्रभाव के बारे में ज्योतिष के विद्यार्थियों तथा ज्योतिषियों को जानकारी दी। खासकर इन विशेष ‘तारों’ का व्यक्ति के साथ ही उसकी संतान पर कैसा असर हो सकता है। उन्होंने अन्य नक्षत्रों के पड़ सकने वाले प्रभाव पर भी प्रकाश डाला। एक स्थानीय अदालत में चल रहे हत्या के केस में नामजद 2 महिलाओं सहित सभी 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा व 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के अनुसार 2016 में मुल्लांपुर थाने के अधीन पड़ते गांव तोंगा निवासी अमरनाथ का कत्ल हो गया था। मुल्लांपुर पुलिस ने मृतक की पत्नी शिकायतकर्ता नर्बदा के ब्यानों पर गांव तोंगा के ही रहने वाले अनिल कुमार उर्फ नीला, पूनम व सरमिस्टा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया था कि उसका पति अमरनाथ कैटरिंग का काम करता था। 22 अक्तूबर, 2016 को उसका पति घर से गया था, परंतु वापस घर नहीं लौटा। वहीं, मुल्लांपुर पुलिस को सेक्टर-16 चंडीगढ़ जनरल अस्पताल से फोन आया था कि एक लाश उनके पास आई है जिसका कोई वारिस नहीं है। पुलिस ने जब जांच की तो लाश अमरनाथ कि निकली। पुलिस जांच में सामने आया कि अमरनाथ अनिल कुमार के पास रेहड़ी लेने के लिए गया था, परंतु अनिल कुमार, पूनम व सरमिस्टा ने अमरनाथ को चोर समझ कर उसकी गांव तोंगा में स्थित गूगामाड़ी के पास जमकर पिटाई की। अमरनाथ को उक्त लोगों ने इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में उक्त तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 व 34 के तहत मामला दर्ज किया था।क स्थानीय अदालत में चल रहे हत्या के केस में नामजद 2 महिलाओं सहित सभी 3 दोषियों को उम्रकैद की सजा व 20-20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। जानकारी के अनुसार 2016 में मुल्लांपुर थाने के अधीन पड़ते गांव तोंगा निवासी अमरनाथ का कत्ल हो गया था। मुल्लांपुर पुलिस ने मृतक की पत्नी शिकायतकर्ता नर्बदा के ब्यानों पर गांव तोंगा के ही रहने वाले अनिल कुमार उर्फ नीला, पूनम व सरमिस्टा के खिलाफ मामला दर्ज किया था। शिकायतकर्ता ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में बताया था कि उसका पति अमरनाथ कैटरिंग का काम करता था। 22 अक्तूबर, 2016 को उसका पति घर से गया था, परंतु वापस घर नहीं लौटा। वहीं, मुल्लांपुर पुलिस को सेक्टर-16 चंडीगढ़ जनरल अस्पताल से फोन आया था कि एक लाश उनके पास आई है जिसका कोई वारिस नहीं है। पुलिस ने जब जांच की तो लाश अमरनाथ कि निकली। पुलिस जांच में सामने आया कि अमरनाथ अनिल कुमार के पास रेहड़ी लेने के लिए गया था, परंतु अनिल कुमार, पूनम व सरमिस्टा ने अमरनाथ को चोर समझ कर उसकी गांव तोंगा में स्थित गूगामाड़ी के पास जमकर पिटाई की। अमरनाथ को उक्त लोगों ने इतनी बुरी तरह पीटा कि उसकी मौत हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में उक्त तीनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 व 34 के तहत मामला दर्ज किया था। प्रशासन ने निगम के अंतर्गत आते 5 गांवों में प्रॉपर्टी टैक्स लगाने की अधिसूचना आज जारी कर दी। प्रशासन के गजट में प्रकाशित होते ही निगम के अंतर्गत आते 5 गांवों में सम्पत्ति कर लग जायेगा। जबकि निगम सदन में इस संबंध में एजेंडा टाल दिया गया था। ज्ञात रहे कि इससे पूर्व भी निगम द्वारा एजेंडा टाल दिए जाने के बावजूद प्रशासन ने शहर में पार्किंग शुल्क लगाया तथा व्यावसायिक व आवासीय भवनों पर सम्पत्ति कर लगाया था। निगम के 5 गांव-हल्लोमाजरा, कजहेड़ी, पलसोरा, मलोया और डड्डूमाजरा में प्रॉपर्टी टैक्स लग जायेगा। यह गांव 2006 में निगम के हवाले किए गए थे। निगम के सर्वे के अनुसार इन गांवों में 4300 दुकानें और व्यावसायिक भवन हैं। इन सभी गांव को ग्रुप फोर जोन-सी में रखा गया है व यहां लोगों को स्व-आंकलन की सुविधा उपलब्ध होगी। निगम में 1996 में शामिल किए गए 4 गांव-बुड़ैल, बटरेला, बढ़हेड़ी और अटावा तथा मनीमाजरा में पहले से ही प्रॉपर्टी टैक्स लागू है।
ज्ञात रहे कि गत जुलाई में सदन की बैठक में यह एजेंडा डेफर कर दिया गया था। पार्षदों का कहना था कि जब तक इन गांवों में पूरी तरह से मूलभूत सुविधायें उपलब्ध नहीं होती तब तक सम्पत्ति कर नहीं लगाना चाहिए।

Tuesday, August 28, 2018

पाँच बड़ी ख़बरें: गौतम नवलखा की गिरफ़्तारी पर कोर्ट में जवाब नहीं दे पाई पुलिस

सनी लियोनी की ज़िंदगी पर बनी 'वेब-सीरीज़', करनजीत कौर, के ट्रेलर में एक पत्रकार उनसे पूछता है, "किसी प्रॉस्टीट्यूट और पॉर्न स्टार के बीच क्या फ़र्क होता है?"
जवाब में सनी लियोनी कहती हैं, "एक सिमिलैरिटी है - गट्स".
यही 'गट्स' यानी हिम्मत सनी लियोनी की चाल, चेहरे और बातों में दिखी जब वो मुंबई के एक होटल में इंटरव्यू के लिए मुझसे मिलीं.
उन्होंने बताया कि करनजीत कौर के लिए पत्रकार के साथ वो इंटरव्यू का सीन शूट करना बेहद मुश्किल था.
सनी लियोनी के बारे में क्यों है एक ख़ास राय
सनी ने कहा, "मुझे बहुत असहज लगा क्योंकि वो बहुत बुरे सवाल थे पर हमने उन्हें रखा क्योंकि ये सवाल लोगों के मन में होते हैं और मैं उनका जवाब देना
सनी लियोनी पिछले पांच सालों से भारत में सबसे ज़्यादा 'गूगल' किया गया नाम है. लोग उन्हें देखना चाहते हैं, उनके बारे में जानना चाहते हैं लेकिन काफ़ी हद तक उनके बारे में अपनी राय पहले ही बना चुके हैं.
चाहती थी."
सनी मानती हैं कि उनके बारे में एक तरह की राय बनने की वजह वो ख़ुद हैं.
"मैं अपनी सोच और अपनी ज़िंदगी को लेकर एकदम पारदर्शी हूँ, लेकिन लोग मुझे मेरे पिछले पेशे से जोड़कर ही देखते हैं, उसमें उनकी कोई ग़लती भी नहीं, पर समय के साथ मैं भी बदली हूँ और उम्मीद है लोग भी मेरे व्यक्तित्व में इस बदलाव को समझेंगे."
वो बॉलीवुड में 'आइटम नंबर' कहे जानेवाले गानों के बाद अब फ़िल्मों में पूरे किरदार निभा चुकी हैं. हाल में उनकी ख़ुद की परफ़्यूम, 'द लस्ट' भी लॉन्च हुई है.
मैंने पूछा कि ये नाम भी तो उनकी ख़ास छवि को ही आगे ले जाता है?
उन्होंने इनकार कर दिया और कहा कि इतनी कम उम्र में अपने नाम की परफ़्यूम होना किसी भी लड़की के लिए ख़्वाब जैसा है और जब वो सच हुआ तो उन्हें यही नाम पसंद आया.
सनी का कहना था, "बाक़ि परफ़्यूम ब्रैंड भी तो ऐसे नाम रखते हैं, जैसे सिडक्शन या फ़ायर एंड आइस." करनजीत कौर', सनी लिओनी का असली नाम है.
उनकी ज़िंदगी पर बनी वेब सीरीज़ को ये नाम दिए जाने का शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति ने विरोध किया था और कहा था कि 'कौर' नाम सिख धर्म में बहुत महत्व रखता है जबकि सनी का काम पॉर्न से जुड़ा था.
सनी के सामने मैंने जब ये बात रखी तो उन्होंने कहा कि ये नाम उनके पासपोर्ट पर है. उनके मां-बाप ने उन्हें दिया था जो अब इसपर सफ़ाई देने के लिए दुनिया में नहीं है
वो बोलीं, "वैसे भी मेरा सच्चा नाम करनजीत कौर है, और सिर्फ़ मेरे काम का नाम सनी लियोनी है."
पॉर्न इंडस्ट्री में अपने काम को लेकर सनी लियोनी कभी शर्मिंदा नहीं हुई हैं. उस दिन भी उन्होंने कहा कि ये उनकी पसंद थी.
भारत में निजी तौर पर पॉर्न देखने पर कोई रोक नहीं है पर पॉर्न वीडियो, तस्वीरें इत्यादि बनाना या बांटना ग़ैर-क़ानूनी है.
दुनिया की सबसे बड़ी पॉर्न वेबसाइट 'पॉर्नहब' के मुताबिक अमरीका, ब्रिटेन और कनाडा के बाद भारत में सबसे ज़्यादा पॉर्न देखा जाता है.
तो क्या भारत में भी क़ानूनी तौर पर पॉर्न इंडस्ट्री होनी चाहिए?
इस सवाल का जवाब देने से सनी एक पल के लिए भी झिझकी नहीं, कहा, "ये मेरा फ़ैसला नहीं, भारत सरकार और यहां के लोगों का होगा".
पर क्या ऐसा उद्योग होने से यौन संबंधों के बारे में सहजता और ख़ुलापन होगा? अमरीका में उनका अनुभव क्या कहता है?
जवाब में सनी ने कहा कि उनकी निजी पसंद किसी और पर थोपी नहीं जानी चाहिए. समाज की सोच हर परिवार से बनती है और हर लड़की की उनकी मां-बाप की परवरिश से.
सनी के मां-बाप को उनका ये फ़ैसला बिल्कुल नागवार था. पर वो मानती हैं कि उन्हें एक बेहद आज़ाद ख़्याल लड़की की तरह बड़ा किया गया जिस वजह से वो अपने मां-बाप की इज़्ज़त भी करती हैं और अपनी पसंद के फ़ैसले भी ले पाई हैं.
अब सनी के अपने बच्चे हैं. उन्होंने एक बेटी को गोद लिया है और सरोगेसी से दो बेटे हैं.
क्या उन्हें वो ज़िंदगी के फ़ैसले लेने की आज़ादी दे पाएंगी?
सनी ने कहा, "बेशक़, मैं चाहूंगी वो ऊंचाइयां छुएं, मार्स तक जाएं लेकिन उनके फ़ैसले और रास्ते उनके अपने होंगे."

Monday, August 13, 2018

केरल में फंसे पर्यटकों को निकालने का काम जारी

दक्षिण भारतीय राज्य केरल भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से बेहाल है. मुन्नार पर्यटन स्थल के एक रिज़ॉर्ट में करीब 57 विदेशी पर्यटक फंसे हुए हैं. इनमें से ज़्यादातर पर्यटक अमरीका, सऊदी अरब और ओमान के रहने वाले हैं.
पर्यटन निदेशालय के एक अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि रिज़ॉर्ट को जाने वाला रास्ता भूस्खलन के चलते बंद हो गया है. हालांकि रिज़ॉर्ट में मौजूद सभी पर्यटक सुरक्षित बताए जा रहे हैं.
केरल के पर्यटन विभाग के निदेशक पी बालाकिरन ने बताया, "रास्ते को खोला जा रहा है. जैसे ही हमें उनके बारे में जानकारी मिली, हमारे अधिकारी और सेना राहत और बचाव के काम में जुट गए. पर्यटक पूरी तरह से सुरक्षित हैं. वहां उनको किसी तरह की परेशानी नहीं हो रही है, रिज़ॉर्ट में उनके लिए पर्याप्त खाना मौजूद है."
केरल के पर्यटन मंत्री ने एक बयान जारी कर बताया कि रिज़ार्ट में फंसे कम से कम चार रूसी परिवार और दो अमरीकी दंपत्तिों को किसी दूसरे रास्ते से नीचे लाया गया है.
केरल में पिछले कुछ दिन से दक्षिण पश्चिम मॉनसून फिर से सक्रिय हो गया है. जिसकी वजह से राज्य में भारी बारिश हो रही है और जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है.
बाढ़ की चपेट में आने से राज्य में अबतक 26 लोगों की मौत हो चुकी है. कई ज़िलों में भूस्खलन हुए हैं. कई जलाशय खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं.
पिछले दो दिनों में 22 बांधों के बैराज खोल दिए गए हैं. इनमें से एक इडुक्की चेरुथोन बांध के बैराज तो 26 साल बाद खोले गए हैं. पेरियार नदी पर बनी ये बांध एशिया के सबसे बड़े बांधों में से एक है.
केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्य की "स्थिति को बेहद गंभीर" क़रार दिया है. स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ, सेना, नैसेना और वायुसेना के 350 से ज़्यादा जवानों को तैनात किया गया है.
अबतक प्रभावित इलाकों से कई लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया गया है.
राहत अभियान के नोडल अफसर पी एच कुरियन ने बीबीसी को बताया, "मौसम विभाग ने और बारिश होने की चेतावनी जारी की है. इसे देखते हुए हमने निचले इलाकों से करीब 20,000 लोगों को निकालकर राहत शिविरों में पहुंचाया है. जलाशयों से अभी और पानी छोड़े जाने की ज़रुरत है. शाम तक कोच्चि और एर्नाकुलम ज़िलों से 8500 और लोगों को निकाल लिया जाएगा."
कुरियन कहते हैं, "जलाशयों से पानी छोड़े जाने की वजह से कोच्चि (केरल की आर्थिक राजधानी) और एर्नाकुलम जैसे शहरों में बाढ़ आने का ख़तरा है. अब, एर्नाकुलम और त्रिचूर जैसे केंद्रीय ज़िले प्रभावित हो रहे हैं."
राज्य प्रशासन ने इडुक्की, कोट्टायम, मलप्पुरम, पलक्कड़, कोझिकोड, कोल्लम, एर्नाकुलम समेत कई ज़िलों में रेड अलर्ट जारी किया है.
पूरा प्रशासन राहत और बचाव अभियान में जुटा है, इसलिए अभी तक इमारतों को हुए नुकसान का जायज़ा नहीं लिया गया है.
इस बीच, विलिंगडन द्वीप की इमारतों की सुरक्षा के लिए नौसेना की दक्षिणी कमान मुख्यालय को अलर्ट पर रखा गया है.

Monday, June 4, 2018

о чём будут говорить в Вене Владимир Путин и Себастьян

Во вторник, 5 июня, Владимир Путин совершит свой первый зарубежный визит после инаугурации. Он прибудет в Вену, где встретится с руководством Австрии и примет участие в праздновании 50-летия сотрудничества двух стран в газовой сфере. В повестке переговоров — строительство «Северного потока — 2» и другие энергетические проекты, двусторонние экономические и культурные связи, урегулирование конфликтов на юго-востоке Украины и в Сирии, а также вопрос выхода США из договора по иранской ядерной программе. Чего стоит ждать от поездки российского лидера — разбирался RT.

5 июня президент России по приглашению своего австрийского коллеги Александра Ван дер Беллена прибудет с однодневным рабочим визитом в Вену. Это первая зарубежная поездка Путина после его инаугурации 7 мая 2018 года и уже пятый визит в австрийскую столицу в качестве президента России. Последний раз он был в Вене четыре года назад — в июне 2014-го. Российский лидер планирует провести переговоры как с Ван дер Белленом, так и с канцлером страны Себастьяном Курцем, с которым они встречались всего три месяца назад в РФ.
Тогда Путин и Курц обсудили широкие перспективы сотрудничества в экономике и политике. Особое внимание было уделено проекту «Северный поток — 2», в строительстве которого участвует австрийский нефтегазовый гигант OMV. По мнению экспертов, и в этот раз энергетической сфере будет уделено особое внимание.
Визит российского президента в Австрию совпадает с 50-летним юбилеем сотрудничества между государствами в нефтегазовой сфере. В июне 1968 года OMV стала первой компанией Европы, подписавшей с СССР соглашение о поставках газа. В апреле 2017-го во время визита в Москву президент OMV Райнер Зеле пригласил российского лидера на торжества, посвящённые, как он выразился, 50-летию «брачного союза» между двумя странами.
Как информирует пресс-служба Кремля, 5 июня Владимир Путин встретится в Вене с представителями российского и австрийского бизнеса и обсудит вопросы двустороннего экономического сотрудничества «с акцентом» на 50-летие начала поставок газа из СССР в Европу.